शिव जी की पूजा कैसे करते हैं ?
शिव जी की पूजा आप शुद्ध मन और सरल सामग्री से कर सकते हैं. आइए घर पर शिव पूजा करने की एक आधारभूत विधि जानते हैं:
पूजा की तैयारी:
- स्नान करें: पूजा शुरू करने से पहले स्नान करें या कम से कम चेहरे और हाथों को धो लें.
- पूजा स्थान तैयार करें: अपने घर में एक नियत स्थान को साफ करें. आप उस पर पूजा का कपड़ा बिछा सकते हैं.
- पूजा सामग्री जुटाएं: इसमें ये चीजें शामिल हो सकती हैं:
- शिवलिंग (भगवान शिव का प्रतीक)
- बेल पत्र (बिल्व पत्र)
- गंगाजल
- दूध
- दही
- शहद
- चीनी (पंचामृत)
- धतूरा (इच्छानुसार)
- फूल (अधिमानतः सफेद)
- अगरबत्ती
- एक छोटी दीपक और तेल
पूजा विधि:
- संकल्प: दीपक और अगरबत्ती जलाएं. संस्कृत में संकल्प का जाप करें, जिसमें आप पूजा करने का अपना संकल्प बताएं.
- आवाहन: शिवलिंग को पूजा के कपड़े पर रखें. भगवान गणेश का आह्वान करने के लिए "ॐ गणेशाय नमः" का जाप करें.
- शुद्धि: शिवलिंग को गंगाजल से शुद्ध करें.
- अभिषेक (स्नान): शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, शहद, चीनी और गंगाजल) चढ़ाएं. आप ऐसा करते समय "ॐ नमः शिवाय" का जाप कर सकते हैं.
- बेल पत्र: शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाएं.
- आरती: दीपक को शिवलिंग के चारों ओर घुमाकर आरती (प्रकाश अर्पण) करें.
- मंत्र: "ॐ नमः शिवाय" या अन्य शिव मंत्रों का जाप करें. आप इन मंत्रों को ऑनलाइन या पूजा पुस्तकों में पा सकते हैं.
- प्रार्थना: भगवान शिव से अपनी प्रार्थना करें. आप अपने दिल की किसी भी इच्छा के लिए प्रार्थना कर सकते हैं.
- समापन: परिवार के सदस्यों में प्रसाद (पवित्र भ offerings) बांटें.
अतिरिक्त जानकारी:
- सोमवार को, विशेष रूप से श्रावण मास के दौरान, शिव पूजा के लिए शुभ माना जाता है.
- आप धार्मिक ग्रंथों या ऑनलाइन संसाधनों में फलों और मिठाइयों जैसे चढ़ावों सहित अधिक विस्तृत पूजा प्रक्रिया पा सकते हैं.
- पूजा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू श्रद्धा और ईमान है.
शिव जी की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी ॐ जय शिव ओंकारा । (Om Jai Shiv Omkara Swami Om Jai Shiv Omkara)
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ (Brahma Vishnu Sada Shiv Arddhanga Dhaara)
एकायन चतुरानन पंचानन राजे । (Ekaanan Chaturanan Panchanan Raaje)
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ (Hansaanan Garudasana Vrishabha Vahana Saaje)
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। (Do Bhuj Char Chaturbhuj Das Bhuj Ati Sohe)
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ (Trijgun Roop Nirankhta Tribhuvan Jan Mohe)
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी । (Akshamala Banmala Rundamala Dhaari)
चंदन मृगमद सोहे भाले शशिधारी ॥ (Chandan Mrigmad Sohe Bhaale Shashidhaari)
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे । (Shwetaamber Peetambar Baghhambar Ang)
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ (Sankadik Garudnadik Bhutadik Sange)
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता । (Kar Ke Madhy Kamalndu Chakra Trishul Dharta)
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ (Jagkarta Jagbharta Jagsansharkarta)
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी । (Kashi Mein Vishwanath Viraajit Nandi Brahmachari)
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ (Nit Uthi Bhog Lagawat Mahima Ati Bhaari)
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे । (Trijgun Shivji Ki Aarti Jo Koi Nar Gaawe)
अंजनी सुत कहत लगातार सुख पावे ॥ (Anjani Sut Kahte Lagataar Sukh Paawe)
ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी ॐ जय शिव ओंकारा ॥ (Om Jai Shiv Omkara Swami Om Jai Shiv Omkara)

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