कार्तिक मास हिन्दू पंचांग के अनुसार सबसे पुण्यकारी महीनों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मास में भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा से जागते हैं और देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी तक का यह काल बहुत फलदायी होता है। कार्तिक मास में दीप दान और तुलसी पूजा का अत्यधिक महत्व है। विशेष रूप से यदि इस माह में कुछ पवित्र स्थानों पर नियमपूर्वक दीपक जलाया जाए तो भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी एवं समस्त देवताओं की कृपा सहजता से प्राप्त की जा सकती है.
कार्तिक मास में दीपक जलाने के पावन स्थान
मंदिर - किसी भी भगवान के मंदिर में शुद्ध देसी घी या तिल के तेल का दीपक जलाने से जीवन में समृद्धि, आरोग्य और पुण्य की अभिवृद्धि होती है।
तुलसी का पौधा - तुलसी को लक्ष्मीजी का रूप माना गया है। कार्तिक मास में रोज सुबह-शाम तुलसी के पास दीपक जलाने से पाप नष्ट होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
नदी या तालाब - सुबह स्नान के बाद या संध्या के समय नदी किनारे, तालाब या अन्य जल स्रोत पर दीपक जलाने से पितरों की तृप्ति होती है और पारिवारिक कष्ट दूर होते हैं।
पीपल का वृक्ष - पीपल में त्रिदेवों का वास माना गया है। इस वृक्ष के नीचे दीपक जलाने से विशेष पुण्य और भयमुक्ति मिलती है।
चौराहा या मुख्य द्वार - चौराहे या अपने घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कार्तिक मास में दीपक जलाने के लाभ
इस मास में दीपदान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, घर में सुख-समृद्धि आती है और असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है
पूर्वजों (पितरों) की आत्मा की तृप्ति के लिए नदी के किनारे दीपदान करना श्रेष्ठ माना गया है।
धर्मशास्त्रों में यह भी कहा गया है कि कार्तिक मास में एक सौ आठ या 365 बातियों वाला दीपक जलाने से सभी दुख दूर हो जाते हैं और घर में लक्ष्मी निवास करती हैं।
तुलसी के पास दिया जलाने से घर में धन, ऐश्वर्य, और आरोग्य की प्राप्ति होती है, साथ ही सौभाग्य में भी वृद्धि होती है।
मंदिर व विशेष स्थलों पर दीपक जलाने से सभी देवी-देवताओं की कृपा सहज मिलती है और पापों का क्षय होता है।
विशेष नियम और सुझाव
- प्रत्येक दिन प्रातः या संध्या के समय स्नान करके साफ वस्त्र पहनकर ही दीप दान करें।
- दीपक शुद्ध घी या तिल के तेल का ही लें।
- तुलसी के पौधे के पास दीपक पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रखें।
- दीपक जलाते समय भगवान विष्णु, लक्ष्मी या “शुभं करोति” मंत्र का जाप करें।
- पूजा के बाद तुलसी की आरती उसी दीपक से करें.
अगर संभव हो तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र नदी में दीप दान अवश्य करें।
कार्तिक मास के इस पुण्यकाल में आदर भाव से यदि ये छोटे-छोटे उपाय किए जाएं, तो परिवार में सुख-शांति, आरोग्य, और खुशहाली बनी रहती है तथा समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। यह माह पुण्य और भक्ति का सरल मार्ग है, जिसमें श्रद्धाभाव के साथ दीप जलाएं, प्रभु का ध्यान करें और निस्वार्थ भाव से दूसरों की भी खुशहाली की कामना करें।

.jpg)
एक टिप्पणी भेजें