जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत,
हरि विष्णु विधाता॥
ब्रह्माणी, रुद्राणी,
कमला तुम ही हो।
जीवन पाथ प्रदायिनी,
भवभयहारिणी तुम ही हो॥
चरण चौड़ी चित्त समावे,
मन बसिया भवानी।
तेरे जनों की सुख दाता,
सुख दाता माता॥
जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत,
हरि विष्णु विधाता॥
ध्यान योग धरे, मन वांछित फल पावे।
दुःख बीरेन्द्र निवारे, सुख संपत्ति पावे॥
मातरन की सेवा, जो कोई नर गावे।
रिद्धि-सिद्धि सुख उपजे, पावन पुत्र पावे॥
जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत,
हरि विष्णु विधाता॥
महालक्ष्मी जी की आरती,
जो कोई नर गावे।
कहत शिवनंदन स्वामी,
सुख संपत्ति पावे॥
जो कोई जन गाता,
उर आनंद समाता।
पाप उतर जाता,
अज्ञान अंधकार मिट जाता॥

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